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हिमायल पर ट्रैकिंग करने की ख्वाहिश रखने वाले एडवेंचर प्रेमियों के लिए अच्छी खबर, पढ़िए

पिथौरागढ़- उत्तराखंड राज्य में अनेकों पर्यटक स्थल हैं। यहाँ हर वर्ग के व्यक्ति के लिए कही सारे पर्यटक और आध्यात्मिक जगाएं हैं।  ऐसी ही एक जगह है पिथौरागढ़ जिले में उच्च हिमालयी दारमा और व्यास घाटियों के मध्य स्थित उच्च मध्य हिमालयी चौदास घाटी जिसे ट्रैकिंग के लिहाज से विकसित किया जाएगा। यह हिमायल पर ट्रैकिंग करने की ख्वाहिश रखने वाले एडवेंचर प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। यहां एक ऐसा ट्रैकिंग रूट बनाने की योजना पर काम आरंभ हुआ है जो तीन घाटियों को एक साथ जोड़ेगी। चौदास घाटी में वन विभाग 70 किमी ट्रैक का निर्माण करने जा रहा है। इस ट्रैक में दुलर्भ वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए रेस्क्यू सेंटर के अलावा पर्यटकों के प्रवास के लिए दो स्थानों पर कक्षों का निर्माण होगा। 73 लाख रुपए की लागत से बनने वाला ट्रैक का कार्य अप्रैल के बाद शुरू  होगा।

इस ट्रैक में रुंगलिंग टॉप और पांगू सुवाकोट में वन्य जीवों की सुरक्षा के रेस्क्यू सेंटर बनेंगे। इस क्षेत्र में हिम  तेंदुआ, कस्तूरा मृग , कांकड़ सहित अन्य वन्य जीव पाए जाते हैं। रेस्क्यू सेंटर में आपसी संघर्ष, गिरने आदि से घायल वन्य जीवों के उपचार की व्यवस्था होगी। रेस्क्यू सेंंटर में एक कक्ष बनेगा तो पर्यटकों, ट्रैकरों और वन कर्मियों के प्रवास के लिए होगा। डॉ. विनय भार्गव ,वनाधिकारी पिथौरागढ़ ने बताया कि रुंगलिंग टॉप और पांगू सुवाकोट टॉप ट्रैकिंग रूट पर्यटन और सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। यहां बनने वाले ट्रैक में दो रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएंगे। इसकी निविदा निकाली जा रही है।

चौदास घाटी का ट्रैक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की घोषणा के अनुरूप बनने जा रहा हैमुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की घोषणा के अनुरूप  चौदास घाटी का ट्रैक बनने जा रहा है।  मुख़्यमंत्री ने पर्यटन और सामरिक महत्व को देखते हुए इस ट्रैक की घोषणा की थी। इस घोषणा के तहत वन विभाग रूंगलिंग टॉप से करछिला होते हुए दारमा के प्रवेश द्वार सेला तक 40 किमी और पांगू के सुवाकोट से सेला तक 30 किमी लंबा ट्रैक पैदल मार्ग बना रहा है। इसको लेकर एक बार टेंडर निरस्त हो चुका है जिसके बाद अब दोबारा टेंडर निकाले जा रहे हैं। मध्य हिमालय का यह पहला ट्रैक दो उच्च हिमालयी घाटियों को जोड़ेगा। ट्रैकर और पर्यटक विविधता से भरे चौदास से दारमा और व्यास उच्च हिमालयी घाटियों में जाकर सैलानी सौंदर्य का आनंद उठा सकेंगे। 

चीन सीमा से लगे इस क्षेत्र का यह ट्रैक साल में दो बार माइग्रेशन करने वाले ग्रामीणों के अलावा सेना, आइटीबीपी, एसएसबी के लिए भी मददगार साबित होगा। आपदा काल में खोज एवं बचाव कार्य में भी यह  ट्रैक काम आएगा। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा विगत लंबे  समय से इस तरह के मार्ग की मांग की जा रही थी। इस ट्रैक के बनने से सीमांत वासियों को एक अच्छा विकल्प मिलेगा। वन विभाग को वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की गश्त के लिए यह रूट अतिमहत्व होगा।

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