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तो क्या राज्य में एक दिन का होगा मानसून सत्र ?

देहरादून : कोरोना संकट के बीच विधानसभा का मानसून सत्र 23 सितम्बर से आयोजित होना है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह सत्र एक दिन का हो सकता है। गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में देश के अलग-अलग राज्यों के सत्रों का हवाला देते हुए इस बारे में चर्चा की गई। यह तय किया गया कि सत्र की अवधि को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत फैसला लेंगे। 
इसी दौरान मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सचिवालय में विश्वकर्मा भवन के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार का निरीक्षण किया और वहां सत्र आयोजन की संभावनाएं टटोली। दूसरी तरफ, विस अध्यक्ष अग्रवाल ने बताया कि इस बार मानसून सत्र विधानसभा में होगा या सचिवालय में, इस विषय में एक-दो दिन में फैसला लिया जाएगा। 
कोरोना संक्रमण के हर दिन बढ़ते मामलों का असर विधानसभा के मानसून सत्र पर भी साफ नजर आ रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग के हिसाब से विधानसभा के सभामंडप में 71 सदस्यों (70 निर्वाचित व एक मनोनीत) के बैठने की व्यवस्था को लेकर जगह कम पड़ रही है। फिलहाल विधानसभा पत्रकार, दर्शक और अधिकारी दीर्घा तक सभामंडप में विस्तार समेत बाकी विकल्पों के बारे में विचार कर रही है। 
बुजुर्ग विधायकों के साथ अन्य विधायकों के भी वर्चुअल आधार पर सत्र से जुड़ने पर जोर दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह चर्चा भी पिछले कई दिनों से चल रही है कि सत्र की अवधि कम हो सकती है।
गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में चर्चा के दौरान कोरोनाकाल में अन्य राज्यों में सत्रों का हवाला देते हुए कहा गया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों ने सत्र की अवधि कम की है। कहा गया कि कोरोना संकट को देखते हुए सुरक्षित शारीरिक दूरी समेत कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन किया जाना जरुरी है। विपक्ष को भी मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर हर तरह से मंथन करना चाहिए। इस बात पर भी जोर दिया गया कि 20 से ज्यादा बुजुर्ग विधायकों को सत्र से वर्चुअल आधार पर जोड़ा जाए। इसका फैसला अब मुख्यमंत्री लेंगे। 

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