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चमोली में यहां बनाया गया उत्तर भारत का पहला आर्किड संरक्षण केंद्र, जानें इसकी खासियत

चमोली : उत्तराखंड के चमोली जिले में गोपेश्वर के समीप खल्ला गांव में ऑर्किड पार्क स्थापित किया गया है। यह पार्क उत्तराखंड वन विभाग की शोध शाखा की ओर से ऑर्किड के संरक्षण के लिए बनाया गया है। साथ ही ये उत्तर भारत का पहला आर्किड संरक्षण केंद्र है।
वन विभाग के अनुसंधान वृत्त की दो साल की मेहनत के बाद वन पंचायत खल्ला की छह एकड़ भूमि में स्थापित यह केंद्र शुक्रवार को जनता को समर्पित किया गया। इस केंद्र में आर्किड की 70 प्रजातियां संरक्षित की गई हैं। साथ ही सैलानियों को आर्किड की जानकारी देने के लिए सवा किमी लंबी ट्रेल (पैदल मार्ग) भी बनाई गई है। वन विभाग के अनुसंधान वृत्त ने वर्ष 2019 में खल्ला वन पंचायत में आर्किड संरक्षण केंद्र की स्थापना के लिए कवायद शुरू की। 
शुक्रवार को वन शोध शाखा के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी और वानस्पतिक सर्वे ऑफ इंडिया के संयुक्त निदेशक डॉ. एसके सिंह ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया।
मुख्य वन संरक्षक (वन अनुसंधान) संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि इस पार्क का मुख्य उद्देश्य राज्य में आर्किड के संरक्षण में जन सहभागिता सुनिश्चित करने के साथ ही इसे स्वरोजगारोन्मुखी बनाना भी है। इससे स्थानीय स्तर पर कृषिकरण के जरिये आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकेंगे। इस मौके पर ऑर्किड सोसाइटी का गठन भी किया गया। इस मौके पर सीपी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र के प्रबंध न्यासी ओम प्रकाश भट्ट, मनोज नेगी, मंगला कोठियाल, वन सरपंच गोविंद बिष्ट, ग्राम प्रधान अरविंद बिष्ट, आदि मौजूद थे। संचालन विनय सेमवाल ने किया। देश में ऑर्किड की कुल 1,256 प्रजातियां हैं। इनमें 388 प्रजातियां खतरे की जद में हैं। उत्तराखंड में ऑर्किड की 238 प्रजातियां हैं। प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण मंडल घाटी में अभी तक इसकी 48 प्रजातियां पाई गई हैं।
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के संयुक्त निदेशक एसके सिंह ने कहा कि आर्किड के लिहाज से मंडल क्षेत्र समृद्ध है। यहां भूमि के साथ बांज, तुन, अंयार के पेड़ों पर उगने वाली आर्किड की प्रजातियां मौजूद हैं। इनका वनस्पति जगत में वही स्थान है, जो जंतु जगत में बाघ का है। मंडल घाटी में बड़े पैमाने पर आर्किड की बहुलता दर्शाती है कि यहां प्रकृति की सेहत दुरुस्त है। अब देश-विदेश के आर्किड प्रेमी मंडल में आकर प्रकृति के इस उपहार से रूबरू हो सकेंगे।

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