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पहाड़ में घर बनाने की राह हो सकती है आसान, सब-डिविजनल चार्ज को लेकर हुई ये चर्चा, जानें इसके बारे में

देहरादून : पर्वतीय क्षेत्रों में घर बनाने की राह आसान हो सकती है। राज्य सरकार इस दिशा में बड़ा फैसला ले सकती है। जिला विकास प्राधिकरणों की बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसके निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सुनियोजित विकास को बढ़ावा देने के लिए कुछ राहत देने पर विचार करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास प्राधिकरणों को स्थगित करने के बाद विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में सुनियोजित विकास के प्रति ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में आवासीय भवनों के नक्शे पास कराने की बाध्यता न रहने के कारण इन क्षेत्रों में सुनियोजित विकास के लिए व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए कोई निर्णय लेना उचित होगा। बैठक में सब डिविजनल शुल्क को लेकर चर्चा हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इस शुल्क में कमी करने की तैयारी कर रही है। मकान बनाने से जुड़ी और सरकारी औपचारिकताओं में भी राहत दी जा सकती है। लिहाजा, मुख्यमंत्री ने शहरी विकास सचिव शैलेश बगोली को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द इसकी आख्या प्रस्तुत करें ताकि इस दिशा में कोई फैसला लिया जा सके।

क्या है सब-डिविजनल चार्ज ?
किसी भी प्लॉट पर प्लॉट साइज गुणा सर्किल रेट का सात फीसदी सब डिवीजनल चार्ज लिया जाता है। उदाहरण के लिए 100 वर्ग मीटर के प्लॉट का सर्किल रेट अगर 20 हजार रुपये है और इस पर सात फीसदी की दर से एक लाख 40 हजार रुपये सब डिवीजनल चार्ज देना होगा। पिछले कुछ दिनों में सरकार ने सब डिविजनल चार्ज में बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद मकान बनाना महंगा हो गया था।

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