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जहाँ शंख की ध्वनि अपने आप गूँजती है

जहाँ शंख की ध्वनि अपने आप गूँजती है

    इसे चमत्कार कहें अथवा विज्ञान का कोई कारण लगभग तीन सौ साल प्राचीन बाराबंकी के सुदूर गाँव में बसे इस मंदिर का घंटे बजाने पर उस मंदिर घंटे के स्वर के साथ-साथ शंख की ध्वनि गूंजने लगती है। पहली बार इस मंदिर में प्रवेश करने  जिस व्यक्ति को इस मंदिर इस खास बात की जानकारी नहीं रहती है वह अपने आप बजने वाली शंख की आवाज सुनकर चौंक उठता है और वह पूरे मंदिर में दौड़-दौड़कर इधर उधर देखता है लेकिन उसे कहीं भी उस शंख को बजाने वाला दिखाई नहीं पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर में जितनी बार इस मंदिर के घंटे बजते हैं उतनी बार शंख की आवाज सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है? क्या इस मंदिर में कोई अदृश्य देव अथवा देवी विराजमान हैं जिनके कारण यहाँ दैवीय प्रभाव की अनुभूति होती है।इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। 

किस देवी या देवता का मंदिर है 

  यह मंदिर देवी काली का है। जिसके कारण स्थानीय लोग इसे माता जी मंदिर के नाम से पुकारते हैं। बाराबंकी जिले के धनौली खास गाँव में स्थापित यह मंदिर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 80किलोमीटर दूर स्थित है। इस मंदिर में माँ काली अपने रुद्र रूप में हैं । उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में जल का कलश है। 

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