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Uttarakhand: होली 2026, नए चलन ने घटाईं दूरियां, अब हर त्योहार मिलते हैं गले, गांव का रिवाज अब शहर तक पहुंचा

पहले लोग अपने आस-पास रहने वाले लोगों को पहचानते तक नहीं थे लेकिन अब सामूहिक आयोजनों में साथ मिलकर जश्न मनाते हैं। शहरों में बच्चे जहां केवल घरों में रहकर इंडोर गेम्स खेला करते थे वह भी अब आपस में मिलने लगे हैं। इससे वे और अधिक सामाजिक हो गए हैं।अब शहरों में त्योहारों के सामूहिक आयोजनों ने लोगों के दिलों के बीच की दूरियां कम कर दी हैं। जहां पहले शहरों में लोग अपने पड़ोस में रहने वाले लोगों को नहीं जानते थे, अब वे हर त्योहार साथ मिलकर मना रहे हैं। कभी त्योहारों की असली रौनक गावों में देखने को मिलती थी वहीं अब शहरों में भी लोग आपसी मेल जोल के साथ पर्वों को मना रहे हैं। लोगों से बातचीत में यह बात सामने आई कि यह ट्रेंड पिछले पांच वर्षों में बदला है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि पहले वह अपने आस-पास रहने वाले लोगों को पहचानते तक नहीं थे लेकिन अब सामूहिक आयोजनों में साथ मिलकर जश्न मनाते हैं। इसके अलावा, बच्चों में भी आपसी मेल-जोल की भावना विकसित हुई है। शहरों में बच्चे जहां केवल घरों में रहकर इंडोर गेम्स खेला करते थे वह भी अब आपस में मिलने लगे हैं। इससे वे और अधिक सामाजिक हो गए हैं। पहले शहर की जिंदगी भागदौड़ भरी और सीमित दायरे में सिमटी थी। अपार्टमेंट और काॅलोनियों में रहने वाले लोग औपचारिक शुभकामनाओं तक ही सीमित रहते थे।

छोटे आयोजन भी बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं
कई कॉलोनियों में होली मिलन समारोह, गणेश उत्सव, गरबा नाइट और दीपावली मिलन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों से न केवल आपसी दूरी कम हो रही है बल्कि सामाजिकता की भावना भी विकसित हो रही है।

कई सामाजिक संगठनों ने मनाया होली समारोह
इस होली कुर्मांचल संस्कृति, बद्री-केदार समिति, ओएनजीसी ऑफिसर्स, अग्रवाल महासभा, वैश्य अग्रवाल राजवंश सभा समेत कई महिला संगठन और शैक्षणिक संस्थानों में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया।
- पहले हम अपने घरों तक ही सीमित रहते थे। अब त्योहारों पर पूरी सोसायटी एक साथ मिलकर सभी त्योहारों की खुशी मनाते हैं। इससे न केवल अपनापन बढ़ता है बल्कि ज्यादा लोगों के साथ त्योहारों का मजा भी बढ़ जाता है। 
- गांव में जैसे सब मिलकर त्योहार मनाते हैं वैसा माहौल अब शहर में भी बनने लगा है। इससे बच्चों को भी सबसे घुलने-मिलने और हमारी संस्कृति को समझने का मौका मिल रहा है। 
- कॉर्पोरेट लाइफ में समय कम मिलता है लेकिन अब सोसायटी में सामूहिक कार्यक्रम होते हैं तो मानसिक तनाव भी कम होता है और पड़ोसियों से अच्छी दोस्ती हो जाती है। 
- अब ज्यादातर लोगों के एकल परिवार हैं। लोग आपस में ही जश्न मना लेते थे। इससे त्योहारों पर उतना मजा नहीं आता था। अब सबके साथ हर त्योहारों की रौनक बढ़ जाती है।
 

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