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मसूरी में 200 से अधिक होटल-रेस्तरां जांच के दायरे में, आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर MDDA का सर्वे

मसूरी, 16 अक्टूबर। पहाड़ों की रानी मसूरी में आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर प्रशासनिक जांच तेज हो गई है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने शहर में ऐसे भवनों और प्रतिष्ठानों की पहचान के लिए सर्वे शुरू किया है, जहां आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन में होटल, रेस्तरां, दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित होने की बात सामने आ रही है।प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 200 से अधिक होटल और रेस्तरां जांच के दायरे में आ सकते हैं।हालांकि यह संख्या अंतिम नहीं मानी जा रही है। सर्वे और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

 स्वीकृत नक्शे और मौके के इस्तेमाल की होगी जांच
MDDA की जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि भवन को किस उपयोग के लिए मंजूरी मिली थी और वर्तमान में उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।यदि किसी भवन का स्वीकृत नक्शा आवासीय है, लेकिन उसमें होटल या रेस्तरां संचालित हो रहा है, तो भवन की स्वीकृति, भूमि उपयोग, निर्माण नियमों और अन्य लागू प्रावधानों की स्थिति देखी जाएगी।हालांकि केवल सर्वे में किसी प्रतिष्ठान का नाम आने का मतलब यह नहीं है कि उसे तत्काल अवैध घोषित कर दिया गया है। प्रत्येक मामले में संबंधित दस्तावेज, स्वीकृत मानचित्र और लागू नियमों के आधार पर स्थिति तय होगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा मामला
मसूरी में चल रही इस कवायद को सुप्रीम कोर्ट के 25 मार्च 2026 के आदेश से भी जोड़कर देखा जा रहा है। Loganathan बनाम State of Tamil Nadu एवं अन्य मामले में अदालत ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ते इस्तेमाल और भवन एवं भूमि उपयोग संबंधी नियमों के उल्लंघन पर चिंता जताई थी।रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में संबंधित स्थानीय निकायों को आवासीय इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान करने के निर्देश दिए थे।सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 25 मार्च 2026 की कार्यवाही से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

 पर्यटन बढ़ा तो बढ़ा व्यावसायिक दबाव
मसूरी में पिछले वर्षों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ होटल, होमस्टे, रेस्तरां और अन्य पर्यटक सुविधाओं की संख्या भी बढ़ी है। पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन सीमित जमीन, संकरी सड़कें, पार्किंग की कमी और निर्माण संबंधी प्रतिबंधों के कारण शहर के नियोजित विकास को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।ऐसे में मौजूदा सर्वे सिर्फ भवनों के नक्शे की जांच तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी सामने आया है कि आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार किस तरह हुआ और निर्माण एवं भूमि उपयोग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।

 होटल कारोबारियों ने मांगा समाधान
इस बीच होटल और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की ओर से पुराने प्रतिष्ठानों के लिए एकमुश्त समाधान अथवा कंपाउंडिंग व्यवस्था की मांग भी उठ रही है।कारोबारियों का तर्क है कि मसूरी में लंबे समय से निर्माण और पर्यटन गतिविधियां बढ़ती रही हैं। ऐसे में पुराने भवनों और पहले से संचालित प्रतिष्ठानों के लिए व्यावहारिक नीति बनाई जानी चाहिए। साथ ही शहर के लिए प्रभावी मास्टर प्लान लागू करने की मांग भी सामने आ रही है।हालांकि किसी भी नियमितीकरण योजना में भवन सुरक्षा, भूमि उपयोग, पर्यावरणीय नियमों और अन्य कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। फिलहाल किसी व्यापक एकमुश्त नियमितीकरण योजना को मंजूरी दिए जाने की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

 आगे क्या होगा?
MDDA की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने प्रतिष्ठानों के स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग में अंतर पाया जाता है। इसके बाद संबंधित मामलों में नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है।इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि मसूरी जैसे पर्यटन शहर में *पर्यटन कारोबार की जरूरतों और नियोजित शहरी विकास के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।

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